Friday, 18 July 2025

Sher aur sharyri

 Sher aur sharyri

Heat

Tatsama Tadbhava

Chakravyuham: The Trap

Freedom (Libre)

A Simple Favor

हम उम्र के उस दौर में है

की उनसे इज़हारे-ए-मोहब्बत भी नहीं कर सकते

याद में तड़पते है उनकी

उनको कह भी नहीं सकते

  • यशपाल बुलन्दशहरी

उसने दिल का हाल बताना छोड़ दिया

हमने भी गहराई में जाना छोड़ दिया

जब उसको ही दूरी का एहसास नहीं

हमने भी एहसास दिलाना छोड़ दिया

अगर आसमा तक मेरे हाथ जाते

तो कदमों में तेरे सितारे बिछाते

तू महगीं बहुत है ज़िन्दगी

अफ़सानों से एहसास तक

कॉफ़ी के कप से

ज़िन्दगी के सफ़र तक

तू महँगी बहुत है ज़िन्दगी…

नज़र कहती नाराज़ है

दिल कहता मेरा महबूब मसलूफ़ है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

एक ख़ूबसूरत नज़र के धोखे में आ गए थे

कुछ देर के लिए हम सदमें में आ गए थे

तलाश तो उसे किसी और की ही थी

हम ख़ामख़ा ही रास्ते में आ गए थे

एक ऐसे शक्स से दिल लगा बैठा हूँ

जिसे भूलना में मेरे बस में नहीं

और पाना मेरी क़िस्मत में नहीं

कोई मेरी आँखो से देखे तो समझे

के तुम मेरे क्या हो

तू धार है नादिया की

मैं तेरा किनारा हूँ

तू मेरे सहारा है

में तेरा सहारा हूँ

आँखो में समंदर है

आशाओ का पानी है

ज़िन्दगी और कुछ भी नहीं

तेरी मेरी कहानी है

तुझे भूलना तो चाह

लेकिन भुला ना पाए

रूठे रहेंगे आप जो हम से

मार जाएँगे हम भी क़सम से

सुन ले हाथ छुड़ाने से पहले

जान हमारी,

इस ज़िंदगी का मैं करूँ क्या खुदा

कि अपने मुझे राह में अकेला छोड़ जाने लगे

- यशपाल बुलन्दशहरी

कभी चहचहातीं थी

लगता है एक जमाना हुआ उससे बात हुए

  • Yash Pal Bulandsehahri

वो चले गए छोड़ कर

हम हाल-ए-दिल उनकी तस्वीर से बता देते है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

मन कहता छोड़ दे, जब उसको ही फ़िक्र नहीं

दिल कहता रुक, मसरूफ़ है वो अभी

क्यों ना करूँ शिकायत तुझसे,

मेरा मर्ज़ भी तू है मेरी दवा भी तू है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

रूठ कर वो जो शांत बैठे है

लाखो तूफान दिल में समाये बैठे है ।

ज़ख़्म हमने भी बहुत खाये है

पर हम उनसे दिल लगाये बैठे है ।।

उनको थोड़ा तो प्यार है मुझसे

इसलिए वो रूठ कर शांत बैठे है

रूठ कर वो जो शांत बैठे है

लाख तूफ़ान दिल में समाये बैठे है

ज़ख़्म इतने गहरे नहीं, फ़ासले इतने लंबे नहीं

जो एक दूसरे से यू हम दूरी बनाये बैठे है

रूठ कर वो जो शांत बैठे है

लाख तूफ़ान दिल में समाये बैठे है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

नाराज़ हम बैठे है ऐसे

उनसे गुफ़्तगू ना करेंगे

रह भी ना पाते बिन उनके

नाराज़ हो कर कैसे जियेंगे

  • यशपाल बुलन्दशहरी

एक धुंध सी थी जो सी छँट गई

एक रात थी जो गुज़र गई

चेहरे पर सुकून तेरे देखा

मेरे चेहरे पर हँसी खिल गई

  • यशपाल बुलन्दशहरी

आदत लगा कर यूँ अपनी तुम गुमशुदा ना होया करो

तुम से दिल लगा बैठे है यूँ नाराज़ ना हुआ करो

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ईश्वर तेरी वंदना से

दिल को सुकून मिलता है ।

उसी से दिल लगा बैठे है

उसी से दिल तड़पा बैठे है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

मिलोगे अल्लाह से जब दुसरे जहाँन में तुम

पूछेंगे जरूर तुमसे,

क्या क़सूर था उनका

चीखो में तुमको उनकी, मेरा दर्द क्यों महसूस ना हुआ

मैंने तो किसी पन्ने पर किसी की मौत का फरमान ना लिखा

फिर तूने कैसे और क्यों किसी को दुःख दिया

खून उनका तेरे सर से मैं माफ ना कर पाऊँगा

तुझे दोनों जहाँन में, सुख ना अब दे पाऊँगा

मिलोगे अल्लाह से जब दुसरे ज़हाँन में

पूछेगा ज़रूर तुमसे

क्या क़सूर था उनका

  • यशपाल बुलन्दशहरी

छोड़ कर दामन मेरा, चैन कैसे पाओगे

याद आएगी जब मेरी, अकेला भीड़ में अपने को पाओगे

  • यशपाल बुलन्दशहरी

बाते जानता हूँ बना लेती हो तुम बहुत मगर

तेरे चेहरे की नाराज़गी याद है मुझे

थी नाराज़गी मुझको भी मगर

हमारी दोस्ती की जड़े कमजोर ना थी

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तेरी राह से गुज़रे तो खबर हुई

मेरे प्यार पर हक़ किसी और का हुआ

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तेरी नज़दीकियाँ मुझे तेरे और क़रीब ले आती है

ना ना करते भी तेरे इश्क़ में गिरफ़्तार किए जाती है

तुझसे दूर भी तो रहा नहीं जाता अब

और तेरी नज़दीकियाँ मुझे बेचैन किए जाती है

नहीं मिलते जिस रोज़ तुम

उस रोज़ दिल की धड़कन मेरी बेसब्र हुई जाती है

दिन कटता नहीं रात गुज़रती नहीं

तुझे देखने की चाहत हर पल बढ़ती जाती है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

खामोश निगाहों से, जो तुम बात करती हो

दिल को बेचैन बार बार करती हो

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ना मालूम था

जमाने में

यू रूठ जाते है अपने

फ़ोन ना उठाने में

  • यशपाल बुलन्दशहरी

मैं तेरे इंतज़ार में रही बरसों

ना तेरा ख़त आया ना जवाब आया

  • यशपाल बुलन्दशहरी

अफ़साना दिलों में बहता रहेगा

ना तुम मुझे भूलोगे, ना मैं तुम्हें भूलूँगा

  • यशपाल बुलन्दशहरी

नज़रो से अपनी, मेरी मोहब्बत माँग ली

और कहते है “मोहब्बत” किस चिड़िया का नाम है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

मैंने दिल के अरमानों को आवाज़ क्या दी

वो कह रहें है “तुम शायर हो”

  • यशपाल बुलन्दशहरी

सखी मेरी नादान है

प्रेम में उसके

जिसको कद्र ना परवाह है

प्यार में डूबी है इतना

की बेसुध, दिल परेशान है

सखी में नादान है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ख़त देकर उनको इंतज़ार में

नदी के किनारे बैठे रहें घंटों

ना वो आया, ना जवाब आया

  • यशपाल बुलन्दशहरी

हालत हुई है ऐसी अब तो

दिल तड़पता तो है

मैं कह तो देता हूँ

हाल-ए-दिल अपना

तू कितना समझे

ये तेरी बात है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

चाय की प्याली

दो समोसे, और तेरा साथ

फिर रुक जाए वक्त

तो क्या बात हो

मैं तुमको निहारू, तुम मुझको

और आँखो से दिल की बात हो

तो क्या बात हो

इतिहास के पन्नो में

एक पन्ना तेरे-मेरे प्यार का हो

तो क्या बात हो

तू हो, फूलो का सेज़ हो

हाथों में मेरे तेरा हाथ हो

तो क्या बात हो

  • यशपाल बुलन्दशहरी

कुछ रिश्तों के लिए शब्द नहीं होते

होती है खामोशी, लफ़्ज़ नहीं होते

तुझसे प्यार इतना है सनम

तुम नहीं होते तो हम नहीं होते

  • यशपाल बुलन्दशहरी

हर रोज़ तुझे देखने की तमन्ना होती है

हर रोज़ तुझसे बात करने की ख्वाहिश होती है

हम सीधे कह नहीं पाते जब

तब लफ़्ज़ो से शायरी होती है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तुम चाय पिया करो दिन कई बार

इस बहाने तुझ से बात कर लेंगे कई बार

वरना तुम मसलूम रहती है इतना

और हम खामोशी से करते है उस चाय का इंतज़ार

  • यशपाल बुलन्दशहरी

अब समझे है वो मोहब्बत मेरी

रोज़ मेरी कब्र पर फूल रख जाते है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

कब से तमन्ना थी तुम से बात करने की

आज मिले भी तो बात ना हुई

  • यशपाल बुलन्दशहरी

जब आया निमंत्रण तुम्हारी शादी का

लफ़्ज़ मोहब्बत के मेरे, बंद लिफाफे में रह गए

  • यशपाल बुलन्दशहरी

उसके भोले से चेहरे से प्यार

ना हो जाए तो कहना

बड़ा पत्थर दिल है सनम मेरा

उसे बेवफ़ा ना कहना

  • यशपाल बुलन्दशहरी

मेरी साँस में, मेरी आस में

मेरी तन्हाई में भी तू शामिल है

दिल के क़रीब है इतना

मेरी हर धड़कन मे तू शामिल है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

नाम जपा कर तु राम का

काम आयेगा एक नाम राम का

  • यशपाल बुलन्दशहरी

वो समय, वो पल, वो लम्हा

वो तेरी मेरी नज़रो का मिलना

इतने बरसो से ज़िंदा है

तेरे प्यार में अहें भरना

  • यशपाल बुलन्दशहरी

प्यार तुम पर आता है

गुस्सा भी तुम पर आता है

कहना तो की मुझे प्यार है तुमसे

पर प्यार के एहसास को शब्द देना

मुझसे नहीं आता है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

अब जीने की इच्छा खत्म हो गई

अब मारने की इच्छा प्रबल हो गई

भूल जाएँगे चिता पर रखा कर मुझको

तहरवी के बाद तो आँसू भी सूख जाएँगे

फिर ऋतु बदलेगी, समा बदलेगा

पर मेरी याद किसी को ना आएगी

वो जिसने अँगुली पकड़ी

वो जिसकी अँगुली पकड़ी

वो जिनसे जवानी में साथ दिया

सब भूल जाएँगे

तस्वीर तक रहेगा नाता

एक दिन दीवार से वो भी उतर जाएगी

  • यशपाल बुलन्दशहरी

पर्दे के पीछे से झलक तेरी देखी

बेचैन दिल की धड़कन तेरी देखी

मोहब्बत तो करते हो नज़रो में मैंने देखी

ना कह पाने की तेरी बेचैनी भी मैंने देखी

  • यशपाल बुलन्दशहरी

किस क़द्र बदलते है लोग यहाँ

संग राह में छोड़ देते है लोग यहाँ

रुकता नहीं वक्त किसी के लिए

वक्त के साथ लोग बदल जाते है यहाँ

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ऋतु बदली, समा बदला

तू बदला कितना यार यहाँ

लेकिन ना बदला बिल्कुल ना बदला मेरे दोस्त

तुझ से मेरा लगाव यहाँ

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ख़्वाबों में तेरे मैं जगह माँग लू

अपने हर होने में तुझे माँग लू

तेरी खामोश निगाहों से

तेरा प्यार माँग लू

तुझ पर में फ़िदा

तुझ से तुझे माँग लू

  • यशपाल बुलन्दशहरी

कुछ लोग सफ़ाई से

एक काम करते है

अपने को बड़ा दिखने को

दूसरो को बदनाम करते है

तुम ना आने बातो में उनकी

तोलना तराज़ू में हर बात उनकी

  • यशपाल बुलन्दशहरी

अच्छी थी दोपहर आज की

बात उनसे हुई आज की

अब मिलने का वादा है

देर तक बैठने का इरादा है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

उनसे मिलने का जब से वादा हुआ है

समय ना जाने क्यों ठहरा ठहरा सा लगता है

गुजरता नहीं दिन याद में उनकी

हर पल ना जाने क्यों ठहरा ठहरा सा लगता है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ना जाने तेरी याद में कितनी चिलम ख़त्म हुई

तू ने फिर भी चिलमन ना उठाया

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तेरे अल्फ़ाज़ो से दिल के अरमान बया नहीं होते

तेरे दिल के अरमान नज़रो से बया होते है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

सपने कई थे आँखो में

चल पड़े थे राहो पे

सोचा ना एक पल में

ज़िन्दगी ना रहेगी

अगले क्षण में

  • यशपाल बुलन्दशहरी

पापा आपके होने से मज़बूती होती है

पापा आपके होने से मनमौज़ी होती है

पापा आपके होने से चाह होती है

पापा आपके होने से दुनिया होती है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

पिला ना ज़हर तू आँखो से मेरे महबूब

तुझे रब से मैंने शिद्दत से मांगा है

तेरी मोहब्बत की अदा है क़ातिल

तुझे रब ने शिद्दत से बनाया है

तेरी ज़ुल्फों के साये में, रात हो

तेरे बाँहों में दिन

तमन्ना बस इतनी थी मेरी

पर बुझे चिराग़ दिल के

मुझे मेरा महबूब ना मिला

  • यशपाल बुलन्दशहरी

सफ़र-ए-सेहर को निकले

दरख़्त एक ना मिला

मिले कई महबूब दिल को

हमसफ़र एक ना मिला

  • यशपाल बुलन्दशहरी

इस शहर ने दिया मुझे बहुत

पर बचपन मेरा दफ़न हुआ यहाँ

सांस तो लेते हम मगर

पर फ़िज़ा में ज़हर बहुत घुला यहाँ

रखना कदम संभल के मेरे दोस्त

छीन लेता ये सेहर, बचपन यहाँ

  • यशपाल बुलन्दशहरी

पुकारती है सुर्ख़ लबों से जब वो नाम मेरा

टूट जाता है साँसो का तरन्नुम मेरा

दिल-ए-अफ़साना कह तो दु उनसे

दिल के हर ज़रे में उतर आता हैं छूट जाना उनका

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ना कह पाए तो क्या

मोहब्बत तब भी थी

मोहब्बत अब भी है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

माना फ़सला कुछ सालो का था

पर धरा पर आने का दिन हमने एक चुना था

जिंदगी के एक मोड़ पर हम बिछड़े कुछ ऐसे थे

फिर मिले लेकिन सफ़र-ए-जिंदगी के राही और थे

  • यशपाल बुलन्दशहरी

गिला बहुत है ख़ुदा से मुझे

क्यूँकि वो तुझको, मुझे देना भूल गया

  • यशपाल बुलन्दशहरी

भूल गया आज रुमाल मुझको

ज़ुकाम बहुत है आज मुझको

नाक से पानी ऐसे बह रहा

मैं हाथों से बार - बार उसको पोछ रहा

धो लेता कभी हाथो को पानी से

और कभी पीछे पोछ लेता हूँ

क्या करूँ सताया हुआ हूँ

याद रूमाल को कर लेता हूँ

मेट्रो के सफ़र में भी

एक साथ तीन छींक आई थी

क्या बताऊ बाद उसके

नाक से कुछ लटका गया

सूड़ करके अंदर लिया मैंने

और नार्मल हो कर बैठ गया

नज़र उठाकर ना देखा मैंने

पर आसपास सीट ख़ाली होने का एहसास हुआ

क्या करूँ सताया हुआ हूँ

ज़ुकाम का मैं मारा हुआ हूँ

  • यशपाल बुलन्दशहरी

काश वक्त को मैं मोड़ पाता

तुझसे इज़हार-ए-मोहब्बत मैं कर पाता

निकला वक्त तेज़ी से था

बिछड़ के तुझसे मोहब्बत होगी ये सोच ना था

अब याद पल पल आती है

नज़रों मे तेरी तस्वीर उभर आती है

मिल तो लेता हूँ तुझसे रोज़ मगर

याद हर पल तेरी आती है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

गर वक़्त थोड़ा मुड़ जाता,

मैं तुमको तुमसे माँग लेता

तेरी प्यारी सी हँसी, तेरा प्यार

तेरी जुल्फों की छाव माँग लेता

गर वक़्त थोड़ा मुड़ जाता,

मैं तुमको तुमसे माँग लेता

कितना वक्त गुज़रा

बिछड़े हुए तुमसे

अब तो राहें भी जुदा है

इस राह में तेरा साथ माँग लेता

गर वक़्त थोड़ा मुड़ जाता,

मैं तुमको तुमसे माँग लेता

याद तेरी बहुत सताती है

पल पल बेचैन किये जाती है

इस बेचैन दिल का मरहम माँग लेता

गर वक़्त थोड़ा मुड़ जाता,

मैं तुमको तुमसे माँग लेता

ये मेरी ज़िंदगानी है

तेरे बिना एक अधूरी सी कहानी है

अपनी ज़िंदगानी में तुझे माँग लेता

गर वक़्त थोड़ा मुड़ जाता,

मैं तुमको तुमसे माँग लेता

  • यशपाल बुलन्दशहरी

गुज़ारिश इतनी सी है मेरी

रोज़ यूही थोड़ी गुफ़्तगू कर लिया करो

कोई बात ना हो तब भी

यूही याद कर लिया करो

  • यशपाल बुलन्दशहरी

उम्मीद नहीं थी

तुम से दिल लगा बैठूँगा

तुम्हारी याद में

अपनी नींदे गँवा बैठूँगा

  • यशपाल बुलन्दशहरी

कश्मकश जिंदगी की

तेरे मेरे साथ है

आ बैठें बात करे

कश्मकश जिंदगी की आसान करे

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तुम्हारे पास रहना

तुम्हें झरोखे से देख लेना

और ना कर पाना

इज़हारे-ए-मोहब्बत

इसी को आशिक़ी कहते है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

यू जो पल्लू तुम छुड़ाने लगी हो

और प्यार की आग भड़काने लगी हो

  • यशपाल बुलन्दशहरी

जब तुम खामोश आँखो से देखती हो

हज़ारो घंटियाँ दिल में बज उठती है

कह तो दू तुम से हाल-ए-दिल अपना

पर हज़ारो सवाल दिल में रह रह उठते हैं

  • यशपाल बुलन्दशहरी

मोहब्बत के रंग भरे दिल में तुमने

अब बेरुख़ी के रंग क्यों बिखरेती हो

अपने प्यार में पागल किया तुमने

अब दिल को बेचैन क्यों छोड़ती हो

  • यशपाल बुलन्दशहरी

कहते है ख़्वाब दिन के

दोनों के सच ब्याँ करते है

मैंने कह तो दिया है ख्वाबों में देखे उनके

दिल तक कब जाती है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

जितनी दुरियाँ तुम बड़ा रही है

उतना प्यार तुम से बड़ा रहा है

ना जाने इसका अंजाम क्या होगा

मेरी मौत में सिमटा होगा

  • यशपाल बुलन्दशहरी

कल जो इंस्टाग्राम पर जादू थी

आज बाज़ार में 4 बच्चों और एक पति से साथ मिली

दिल से जिसको चाह किया

वो किसी और की मिली

  • यशपाल बुलन्दशहरी

मैं बदला, तुम बदले

या ये वक्त बदला है ।

कुछ तो बदला है बीच हमारे

जो दुरियाँ हो गई है बीच हमारे ।।

  • यशपाल बुलन्दशहरी

क़सम क़सम से चार बजे

एक सपना देखा चार बजे

मेरी वो सपने में आई थी

मन में आग लगाई थी

स्वर्ग से भी सुंदर थी

वो जो सपने में आई थी

देखा मैंने उसका

और उसने देखा मुझको

फिर मन में आग लगाई थी

वो चार बजे सपने में आई थी

आगे हुआ जो

वो कह नहीं सकता

कविता में उनको पिरो नहीं सकता

ख़ुद ही समझो यारो मेरे

वो क्यों सपने में आई थी

क़सम क़सम से चार बजे

एक सपना देखा चार बजे

मेरी वो सपने में आई थी

मन में आग लगाई थी

  • यशपाल बुलन्दशहरी

हर गुज़रता वक़्त एक सीख दे कर जाता है

तुझसे बिछड़ना एक गम दे जाता है

मसलें बहुत है ज़िन्दगी में

पर तेरा प्यार मुझे कदमों पर ले आता है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ना दुआ ना सलाम

ना नाराज़गी का कारण पूछा

बस बैठ गए पहलू में

जब ग़ुस्से का उफन देखा

  • यशपाल बुलन्दशहरी

ना कहा है

ना कहूँगा

पर तेरी हर साँस

में शामिल कहूँगा

ना पाए तू भी चैन कहीं

रब से मैं दुआ बार बार करूँगा

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तेरी अदाओ,

तेरी ख़ूबसूरती

पर क्या लिखू

जब खुदा ने फुर्सत से

तुझे लिख दिया

  • यशपाल बुलन्दशहरी

बूँदों की रुनझुन जब आई,

धरती ने मुस्कान दिखाई।

भीगे पत्ते, भीगी गलियाँ,

संग लायीं कुछ मीठी कहानियाँ।

बादल गरजे, बिजली चमकी,

ठंडी हवा कुछ गुनगुन सी बही।

कागज़ की नावें फिर तैरीं,

बचपन की यादें भी संग बह चलीं।

खिड़की के पास बैठा मन,

सपनों में खोया हर एक क्षण।

चाय की प्याली, पकौड़े गरम,

इन लम्हों में छुपा है मौसम का धरम।

हर बूँद में जीवन की बात,

बरसात लाती है सौगात।

मन का सूखा भी भीग जाए,

जब आसमां खुद झरने आए।

  • यशपाल बुलन्दशहरी

भीगता मौसम

मुझे मेरे बचपन की गलियों में ले जाता है

जब साइकिल के पहिये से

मोहल्ला नाप लेते थे

उस देश में ले जाता है

ना चाय की चाह थी

ना पकौड़े तलते थे

सिर्फ दोस्तों के साथ

मटरगस्ती करते थे

ये भीगता मौसम

मुझे मेरे बचपन की गलियों में ले जाता है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

हसरत तेरे दीदार की लिए

मैं रोज़ चला आता हूँ

तुझसे मिलने के लिए

मेरे दिल की तड़प को

कब तू जानेगी

तेरे दर पर रोज़ चला आता हूँ

तड़पने के लिए

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तेरे दीदार की आरज़ू में

हर सुबह दिल तुझ तक ले आता है,

तुझसे मिलने की चाह में

हर लम्हा मुझे तड़पाता है।

कभी तो समझेगी तू इस दिल की बेकरारी,

तेरे दर पर रोज़ आता हूँ,

बस तुझमें ही खुद को पाता हूँ

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तेरे दीदार की तमन्ना लिए

हर रोज़ तेरे दर तक चला आता हूँ।

मुलाक़ात की उम्मीद में

दिल की बेचैनी संग लाता हूँ।

कब समझेगी तू इस तड़प को मेरी,

हर दिन तेरे सामने

बस तड़पने चला आता हूँ।

  • यशपाल बुलन्दशहरी

हसरत-ए-दीदार में रोज़ तेरे कूचे आता हूँ,

अरज़-ए-मुलाक़ात लिए दिल को समझाता हूँ।

तेरी नज़रों की तलाश में हर पल तड़पता हूँ,

तू न समझे तो भी तेरे दर पे झुकता हूँ।

कभी तो रखेगी तू भी मेरे जज़्बातों का ख़याल,

वरना मैं तो मोहब्बत में हर रोज़ मरता हूँ, हर रोज़ जीता हूँ

  • यशपाल बुलन्दशहरी

हसरत-ए-दीदार दिल में लिए,

तेरे कूचे की राहों में आ जाता हूँ।

हर सुबह एक दुआ बनकर,

तेरे नाम की सदा लाता हूँ।

नज़रों की वो पहली झलक,

अब तक मेरी रूह में बसी है।

तेरे ख्यालों की बारिश में,

ये तन्हा रातें भीगी-भीगी सी हैं।

तू जाने न जाने मेरे हालात को,

मैं फिर भी तुझसे वफ़ा निभाता हूँ।

तेरे सिवा कोई आरज़ू नहीं अब,

मैं मोहब्बत में ये मुक़ाम पाता हूँ।

कभी तो होगी तेरे दिल में भी हलचल,

कभी तो तेरा दिल भी धड़केगा मेरे लिए।

वरना उम्र सारी तेरे इंतज़ार में,

तेरे दर पे आके यूँ ही कट जाएगी।

  • यशपाल बुलन्दशहरी

हसरत-ए-दीदार लिए, मेरे क़दम तेरे कूचे आ जाते हैं,

हर सुबह एक दुआ बनकर, तेरा नाम बुलाते हैं।

नज़रों की वो पहली झलक आज भी दिल में बसी है,

तेरे ख्यालों की बहारें, मेरी तन्हाई में भीगी-भीगी सी हैं।

तू जाने न जाने, पर मैं तेरे लिए वफ़ा निभाता हूँ,

मैं हर बार तुझसे बिछड़ कर भी, तुझसे वफा चाहता हूँ।

कहीं तू हो भी गई मेरे दिल से जुदा पल के लिए,

मेरा दिल फिर भी तुझी में लौटेगा, हर हाल में तेरे लिए।

वरना उम्र सारी, तेरे दिए ज़ख्मों को सीते गुज़र जाएगी।

  • यशपाल बुलन्दशहरी

प्रेमिका और पत्नी में वही अंतर है

जो पेड़ से तोड़े आम और ख़रीदे हुए आम ने अंतर है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

साफ़ दिल से की थी इल्तिजा रब से,

हर लफ़्ज़ में थी सच्चाई उस अजब से।

दोपहर को माँगी थी जो दुआ दिल से,

शाम होते ही मिल गई ख़ुशी सब सबब से।

  • यशपाल बुलन्दशहरी

सच्चे दिल से जो भी माँगा भगवान से,

वो कभी खाली नहीं जाता।

आज दोपहर को माँगी थी दुआ —

और शाम होते-होते पूरी भी हो गई।

  • यशपाल बुलन्दशहरी

जब भी तेरे सामने बैठता हूँ

मेरी रोम रोम तेरी गीत गाती है

इक ज़ुबान ही मेरी ऐसी है

जो कुछ नहीं कह पाती है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तीन दिन वो हफ़्ते के

तीन दिन वो तुझसे मुलाक़ात के

तीन दिन वो मेरी सरगोशी के

तीन दिन वो तुझसे बातो के

तीन दिन मेरे प्यार के और

फिर चार दिन फिर तुझसे

मिलने के इंतज़ार के

  • यशपाल बुलन्दशहरी

फँस गए अज़ाब दुविधा में दोस्तों

उनसे कह भी नहीं सकते

और उनके बिना रह भी नहीं सकते

  • यशपाल बुलन्दशहरी

बस गए हो दिल में तुम ऐसे

लाख कौशिशों के बाद भी

तुम उतर नहीं रहे हो दिल से

  • यशपाल बुलन्दशहरी

धुरी पर साज़ी थी धरती

तेरे नाम ले दिया

ना करते करते

तुझी से प्यार कर लिया

  • यशपाल बुलन्दशहरी

जानता हूँ देर है

पर नसीब से

तेरे हम क़रीब है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

चार दिन की है

मेरी जिंदगी कुछ अजीब सी है

मिलना ना मुकद्दर में वो

जिसकी तम्मना दिल को

कई जन्मो सी है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तेरे मेरे 36 अवगुण मिलते है

इसलिए तुझसे मुस्कुराकर हम मिलते है

  • यशपाल बुलन्दशहरी

इस मानसून में ग़ज़ब हो गया

मूसलाधार बारिश में

उसके प्यार में

मैं फिसल गया

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तुझसे प्यार तो मुझे पहली नज़र से था

तेरी दुरियों से इतना बढ़ेगा

ये सोचा ना था

  • यशपाल बुलन्दशहरी

पहले भी कोई तुम सा नहीं था

आज भी कोई तुम सा नहीं है

मेरी नज़रो में जरा ख़ामोशी से देखो मेरे मेहरबा

पहले भी तुम थे और आज भी तुम नज़र आओगे

  • यशपाल बुलन्दशहरी

तुझसे प्यार मेरा पहली नज़र का है

तेरी प्यारी सी आँखो को

सूरज चंदा तारे जुगनू

सबकी अपनी हस्ती है

जिसमें जितना नीर हो बदली, उतनी देर बरसती है

तेरी शक्ती अपार, तू तो लाया रे अकेला गंगा

धरती पे उतार, हिम्मत न हार ...

आसान है जाना महफ़िल से

ओ कैसे जाओगे निकल कर दिल से

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