शीर्षक : तमन्ना
इतनी तमन्ना नहीं हुई, मिलने की किसी से
जितना दिल तुम पर धड़कता है
तुम ख्वाब हो या हकीकत
तुमसे मिलने को जी करता है।
चातक भी इतना बेचैन नहीं होता, चाहत में
जितनी बेचैनी से दिल तुम को याद करता है।
तुम ख्वाब हो या हकीकत
तुमसे मिलने को जी करता है।
मैं दिल को तसल्ली दुँ तो कैसे
एक तुम्हारी झलक को ये बेचैन रहता है।
तुम ख्वाब हो या हकीकत
तुमसे मिलने को जी करता है।
(C) Yash Pal
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