Monday, 5 March 2018

कहानी : पटरी पर लौटती जिंदगी



शीर्षक : पटरी पर लौटती जिंदगी

वो सोमवार की एक सुबह थी l  बच्चे स्कूल जा चुके थे।  में भी ऑफिस के लिए तैयार हुआ और लंच के लिए किचन में गया और लंच बॉक्स ले कर बैग में डाला रहा थी की रेखा ने कहा की काफी दिन हो गए में बीमार नहीं हुई।  मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और ऑफिस के लिए निकल गया  

शाम को 7:00 बजे मैंने बच्चो और रेखा को कराटे क्लास से पिक किया l कार बैठते हुए रेखा ने  कहा की तबियत ठीक नहीं लग रही, बुखार सा लग है। रात को सोते वक़्त बुखार की टेबलेट खाकर वह सो गयी l  

सुबह जब वह सो कर उठी उसकी तबियत ठीक नहीं थी।  लेकिन फिर भी उसने बच्चो को स्कूल के लिए तैयार किया पर मेरे लिए लंच तैयार करने की हालत में वह नहीं थी।  मैंने ज्यादा जोर भी नहीं दिया और ऑफिस के लिए निकल गया l

शाम को ऑफिस से जल्दी आकर मैं उसको मैक्स हॉस्पिटल - नोएडा लेकर गया l  

डॉक्टर ने देखा और तुरंत  ब्लड टेस्ट और स्वाइन फ्लू के टेस्ट के लिए लिख दिया।    अगले दिन रिपोर्ट मिली l उसका स्वाइन फ्लू का टेस्ट पॉजिटिव था यह सुन कर दिल को एक झटका लगा पर फिर भी मैंने आपने को संभाला और रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास गया l  डॉक्टर ने रिपोर्ट देखी और त्रिमफ्लू लिख दिया।  

ट्रिम्फुल, जो की एक कंट्रोल्ड मेडिसिन थी, की उपलब्धता मैक्स नोएडा मे नहीं थी।   अतः मुझको मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज से मेडिसिन लेने जाना पड़ा , वहाँ भी उसकी उपलब्धता कम थी लेकिन मिल गया।  

दवा लेकर में घर पंहुचा और रेखा को नियमानुसार दवाई लेने को कहा। क्यूंकि मुझको भी खाँसी की समस्या थी मैं अपने लिए खांसी की दवाई ले आया था l रात भर में सारी दवा पी ली।

सुबह - सुबह उठ कर टॉयलेट गया तो लेकिन बाहर आते वक़्त दवा के नशे की वजह से सिर चकरा गया और वही गिर पड़ा। 

जब होश आया तो मेरे पास रेखा, मम्मी, बच्चे और रेखा के चाचा और भाई भी थे। हम तुरंत  राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल के लिए हम रवाना हुए।

हॉस्पिटल में स्वाइन फ़्लु वाले वार्ड में मुझको ले जाया गया और ब्लड टेस्ट किया जोकि पॉजिटिव था।  डॉक्टर में स्वाइन फ़्लु की दवा दी और हम घर वापस आ गए।

शाम को रेखा ने बताया की मैं काफी देर बेहोश रहा था जिससे बच्चे, मम्मी और वो काफी डर  गए थे।

लगभग दो दिन की दवा से हालत संभली और जिंदगी फिर पटरी पर वापस आयी।







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